Gopiyan Dhundh Rahi Mohan Ko

अनुराग गोपियाँ ढूँढ रही मोहन को हम भटक रही है वन में, प्रिय दर्शन दे दो हमको वह प्रेम भरा आलिंगन, मनमोहक प्यारी चितवन तो लगीं गर्व हम करने, त्रुटि हमसे हुई बिहारी हे पीपल, आम, चमेली! चितचोर कहाँ क्या देखा! तुम हमको मार्ग बता दो,हम दुःखी हैं ब्रजनारी तब चरणचिन्ह गोविन्द के, वें देख […]

Ghanshyam Bulawe Radha

हिंडोला (राजस्थानी) घनश्याम बुलावे राधा, थे झूलण चालो बाग में मलय-चँदन को बन्यो हिंडोलो, बँधी रेशमी डोर झूलो आप झुलावे मोहन, नाच रह्यो मन-मोर सजधज आई बाग में राधा, कण्ठ फूल को हार चम्पा, जूही और चमेली, शीतल बहे बयार दादुर, मोर, पपीहा बोले, पीव पीव करे पुकार शिव, ब्रह्मा सनकादिक निरखे, कोई न पायो […]

Ghanshyam Mujhe Apna Leo

शरणागति घनश्याम मुझे अपना लेओ, मैं शरण तुम्हारे आन पड़ी मैंने मात, पिता घर बार तजे, तो लोग कहें मैं तो बिगड़ी अब छोड़ सभी दुनियादारी, मैं आस लगा तेरे द्वार खड़ी यौवन के दिन सब बीत गये, नहिं चैन मुझे अब एक घड़ी हे प्राणेश्वर, हे मुरलीधर, मुझको है तुमसे आस बड़ी वह नयन […]

Baje Baje Muraliya Baje

बाजे बाजे मुरलिया बाजे वृन्दावन में तरू कदम्ब तल, राधे श्याम बिराजे अद्भुत शोभा दिव्य युगल की, कोटि काम रति लाजें नटवर वेष घण्यो साँवरिया, बाँस की बनी बँसुरिया, बंशी धुनि सुनि भगन सबहिजन, प्रीति रीति रस जागे कनक मुद्रिका अँगुरी सोहे, मोर मुकुट माथे पे सोहे, गोपी ग्वाल मुदित मन बिहसें सकल गोरी लाजे […]

Shrimad Bhagawat Mahima Apar

श्रीमद् भागवत श्रीमद् भागवत महिमा अपार नित नवण करे श्रद्धा पूर्वक, भवसागर से हो जाय पार यद्यपि पुराण अठ्ठारह हैं, स्थान उच्च पर भागवत् का श्रीकृष्ण-कथा पावन इसमें, वाङमय स्वरूप राधावर का भगवदीय तत्व का मना सुलभ, होता हमको इसके द्वारा यह महा-पुराण, हम सुने कहे श्रीकृष्ण-चरित इसमें सारा सब उपनिषदों का सार यही, आत्मा […]

Chit Chura Liya Is Chitwan Ne

मोहन की मोहिनी चित्त चुरा लिया इस चितवन ने आनंद न समाये उर माहि, सखि अटक गया मनमोहन में यशुमति के आंगन खेल रहा, मैं मुग्ध हुई उसकी छबि पर मैं भूल गई घर बार सभी, जादू छाया उसका मुझ पर कानों में कुण्डल को पहने, सखि चमक गाल पर झलक रही आभास हुआ मुझको […]

Chintan Karti Sada Gopiyan

गौधरण चिन्तन करतीं सदा गोपियाँ, मुरलीधर का रम जातीं कर गान श्याम की लीलाओं का जभी चराने गौंओं को वे वन में जाते उनकी चर्चा करें, शाम तक जब वे आते अरी सखी! वंशी में जब वे स्वर को भरते सिद्ध पत्नियों के मन को नन्दनन्दन हरते मोर पंख का मुकट श्याम के मस्तक सोहे […]

Chaitanya Swarup Hi Atma Hai

आत्मानुभूति चैतन्य स्वरूप ही आत्मा है यह शुद्ध देह का शासक है, अन्तःस्थित वही शाश्वत है आत्मा शरीर को मान लिया, मिथ्या-विचार अज्ञान यही यह देह मांसमय अपवित्र और नाशवान यह ज्ञान सही है इच्छाओं का तो अन्त नहीं, मन में जिनका होता निवास मृग-तृष्णा के ही तो सदृश, मानव आखिर होता निराश यह राग […]

Chaitanya Maha Prabhu Ki Jay Jay

चैतन्य महाप्रभु चैतन्य महाप्रभु की जय जय, जो भक्ति भाव रस बरसाये वे विष्णुप्रिया के प्राणनाथ, इस धरा धाम पर जो आये वे शचीपुत्र गौरांग देव प्रकटे, सबके मन हर्षाये हे देह कान्ति श्री राधा सी, जो भक्तों के मन को भाये रस के सागर चैतन्य देव, श्री गौर चन्द्र वे कहलाये आसक्ति शून्य वह […]

Chod Jhamela Jhuthe Jag Ka Kah Gaye Das Kabir

मिथ्या संसार छोड़ झमेला झूठे जग का, कह गये दास कबीर उड़ जायेगा साँस का पंछी, शाश्वत नहीं शरीर तुलसीदास के सीता राघव उनसे मन कर प्रीति रामचरित से सीख रे मनवा, मर्यादा की रीति बालकृष्ण की लीलाओं का धरो हृदय में ध्यान सूरदास से भक्ति उमड़े करो उन्हीं का गान मीरा के प्रभु गिरिधर […]