Tulsi Mira Sur Kabir
भक्त कवि तुलसी मीरा सूर कबीर कण्ठहार जन जन के चारों, हर लेते तन मन की पीर रामचरित के तुलसी गायक, कृष्ण भक्ति में सूर अधीर मीराबाई कृष्ण विरहिणी, कबीर देते ज्ञान गँभीर भक्ति, ज्ञान अरु कर्म समन्वय तुलसी की रामायण में बालकृष्ण की लीलाओं का भाव सूर के गीतों में गिरिधारी के दर्शन पाने […]
Tu Apne Ko Pahchan Re
जीवात्मा तूँ अपने को पहचान रे ईश्वर अंश जीव अविनाशी, तूँ चेतन को जान रे घट घट में चेतन का वासा, उसका तुझे न भान रे परम् ब्रह्म का यह स्वरूप है, जो यथार्थ में ज्ञान रे रक्त मांस से बनी देह यह, जल जाती श्मशान रे वे विश्व वद्य वे जग-निवास, कर मन में […]
Tu Ga Le Prabhu Ke Geet
हरि भजन तूँ गा ले प्रभु के गीत दुनिया एक मुसाफिर खाना, जाना एक दिन छोड़ के मात-पिता बंधु सुत पत्नी, सब से नाता तोड़ के एक दिन ये सुन्दर घर तेरा मिट्टी में मिल जाएगा तुझे अचानक ले जाने को, काल एक दिन आएगा अब तो होश सँभालो प्यारे, व्यर्थ ही समय गँवाओ ना […]
Tu So Raha Ab Tak Musafir
चेतावनी तूँ सो रहा अब तक मुसाफिर, जागता है क्यों नहीं था व्यस्त कारोबार में,अब भोग में खोया कहीं मोहवश जैसे पतिंगा, दीपक की लौ में जल मरे मतिमान तूँ घर बार में फिर, प्रीति इतनी क्यों करे लालच में पड़ता कीर ज्यों, पिंजरे में उसका हाल ज्यों फिर भी उलझता जा रहा, संसार माया […]
Trashna Hi Dukh Ka Karan Hai
तृष्णा तृष्णा ही दुःख का कारण है इच्छाओं का परित्याग करे, संतोष भाव आ जाता है धन इतना ही आवश्यक है जिससे कुटंब का पालन हो यदि साधु सन्त अतिथि आये, उनका भी स्वागत सेवा हो जो सुलभ हमें सुख स्वास्थ्य कीर्ति, प्रारब्ध भोग इसको कहते जो झूठ कपट से धन जोड़ा, फलस्वरूप अन्ततः दुख […]
Tore Ang Se Ang Mila Ke Kanhai
प्रेम दिवानी तोरे अंग से अंग मिला के कन्हाई, मैं हो गई काली मल-मल धोऊँ पर नहीं छूटे, ऐसी छटा निराली तेरा तन काला और मन काला है, नजर भी तेरी काली नैनों से जब नैन मिले तो, हो गई मैं मतवाली तू जैसा तेरी प्रीत भी वैसी, एक से एक निराली करूँ लाख जतन […]
Tha Magh Mas Braj Balayen
चीर हरण था माघ मास ब्रज बालाएँ, यमुना जल में सब स्नान करें होता था ऊषाकाल जभी, श्रीकृष्ण चरित गुणगान करें जल क्रीडा में थी मग्न सभी, तत्काल श्याम वहाँ पहुँच गये अभिलाषा जो उनके मन में, सर्वेश्वर उसको जान गये ले वस्त्र उठा बालाओं के, वे तरु कदम्ब पर चढ़े तभी वे बोले सुन्दरियों […]
Thara Darsan Kis Vidh Paaun Sanwariya
दरस लालसा थारा दरसन किस विध पाऊँ साँवरिया, औगुण की मैं खान बाल अवस्था खेल गँवाई, तरुणाई अभिमान यूँ ही जीवन खोय दियो मैं, डूब्यो झूठी शान लग्यो रह्यो स्वारथ में निस दिन, सुख वैभव की बान मात-पिता गुरु से मुख मोड्यो, कियो नहीं सनमान साँच झूठ कर माया जोड़ी थारो कियो न गान साधू-संगत […]
Din Vyartha Hi Bite Jate Hain
चेतावनी दिन व्यर्थ ही बीते जाते हैं जिसने मानव तन हमें दिया, उन करुणा निधि को भुला दिया जीवन की संध्या वेला में हम ऐसे ही पछताते हैं घर पुत्र मित्र हे भाई मेरा, माया में इतना उलझ गया धन हो न पास, जर्जर शरीर, ये कोई काम न आते हैं दुनियादारी गोरख धंधा, आकण्ठ […]
Din Dukhi Bhai Bahano Ki Seva Kar Lo Man Se
जनसेवा दीन दुःखी भाई बहनों की सेवा कर लो मन से प्रत्युपकार कभी मत चाहो, आशा करो न उनसे गुप्त रूप से सेवा उत्तम, प्रकट न हो उपकार बनो कृतज्ञ उसी के जिसने, सेवा की स्वीकार अपना परिचय उसे न देना, सेवा जिसकी होए सेवा हो कर्तव्य समझ कर, फ लासक्ति नहीं होए परहित कर्म […]