Rasna Kyon Na Ram Ras Piti

राम रसपान रसना क्यों न राम रस पीती षट-रस भोजन पान करेगी, फिर रीती की रीती अजहूँ छोड़ कुबान आपनी, जो बीती सो बीती वा दिन की तू सुधि बिसराई, जा दिन बात कहीती जब यमराज द्वार आ अड़िहैं, खुलिहै तब करतूती ‘रूपकुँवरि’ मन मान सिखावन, भगवत् सन कर प्रीती 

Jiv Bas Ram Nam Japna

हरिनाम स्मरण जीव बस राम नाम जपना, जरा भी मत करना फिकरी भाग लिखी सो हुई रहेगी, भली बुरी सगरी ताप करके हिरणाकुश राजा, वर पायो जबरी लौह लकड़ से मार्यो नाहीं, मर्यौ मौत नख री तीन लोक ककी माता सीता, रावण जाय हरी जब लक्षमण ने करी चढ़ाई, लंका गई बिखरी आठों पहर राम […]

Din Yu Hi Bite Jate Hain Sumiran Kar Le Tu Ram Nam

नाम स्मरण दिन यूँ ही बीते जाते हैं, सुमिरन करले तूँ राम नाम लख चौरासी योनी भटका, तब मानुष के तन को पाया जिन स्वारथ में जीवन खोया, वे अंत समय पछताते हैं अपना जिसको तूँने समझा, वह झूठे जग की है माया क्यों हरि का नाम बीसार दिया, सब जीते जी के नाते हैं […]

Bhajo Re Bhaiya Ram Govind Hari

हरि कीर्तन भजो रे भैया राम गोविन्द हरी जप तप साधन कछु नहिं लागत, खरचत नहिं गठरी संतति संपति सुख के कारण, जासे भूल परी कहत ‘कबीर’ राम नहिं जा मुख, ता मुख धुल भरी

Man Ram Sumar Pachtayega

सत्संग मन राम सुमर पछतायेगा पापी जियरा लोभ करत है, आज काल उठ जायेगा लालच में सब जनम गँवायो, माया भरम लुभायेगा धन जीवन का लोभ न करिये, साथ न कुछ भी जायेगा धरम राज जब लेखा माँगे, क्या मुख उन्हें बतायेगा कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, सत्संग से तर जायेगा

Ram Nam Ke Bina Jagat Main

राम आसरा राम नाम के बिना जगत में, कोई नहीं भाई महल बनाओ बाग लगाओ, वेष हो जैसे छैला इस पिजड़े से प्राण निकल गये, रह गया चाम अकेला तीन मस तक तिरिया रोवे, छठे मास तक भाई जनम जनम तो माता रोवे, कर गयो आस पराई पाँच पचास बराती आये, ले चल ले चल […]

Ram Bhaja So Hi Jag Main Jita

भजन महिमा राम भजा सोहि जग में जीता हाथ सुमिरनी, बगल कतरनी, पढ़े भागवत गीता हृदय शुद्ध कीन्हों नहीं तेने, बातों में दिन बीता ज्ञान देव की पूजा कीन्ही, हरि सो किया न प्रीता धन यौवन तो यूँ ही जायगा, अंत समय में रीता कहे ‘कबीर’ काल यों मारे, जैसे हरिण को चीता

Ek Ram Bharosa Hi Kali Main

राम भरोसा एक राम भरोसा ही कलि में वर्णाश्रम धर्म न दिखे कहीं, सुख ही छाया सबके मन में दृढ़ इच्छा विषय भोग की ने, कर्म, भक्ति, ज्ञान को नष्ट किया वचनों में ही वैराग्य बचा और वेष ने सबको लूट लिया सच्चे मन से जो जीवन में, रामाश्रित कोई हो पाये भगवान अनुग्रह से […]

Badi Maa Kaise Jiun Bin Ram

भरत का प्रेम बड़ी माँ! जीऊँ कैसे बिन राम सिया, राम, लछमन तो वन में, पिता गये सुरधाम कुटिल बुद्धि माँ कैकेयी की, बसिये न ऐसे ग्राम भोर भये हम भी वन जैहें, अवध नहीं कछु काम अद्भुत प्रेम भरत का, प्रस्थित गये मिलन को राम 

Bhagwan Aapke Ram Rup

श्री राम स्तुति भगवान् आपके राम रूप को, करता हूँ सादर प्रणाम प्रभु शुद्ध, शान्त, संतों के प्राण, सीतापति मर्यादा नीति धाम अखिलेश्वर हो, आनँदकंद, प्रभु अद्धितीय हितकारी हो हे लक्ष्मी पति, देवादि देव, सच्चिदानंद भयहारी हो गुणग्राम, अपका जपूँ नाम, सृष्टि के कर्ता धर्ता हो हे अविनाशी, हे विश्वात्मा, पालनहारी, संहर्ता हो हे रावणारि […]