Mhara Sohan Sundar Shyam Pyara Bega Aajyo Ji

मथुरा गमन (राजस्थानी) म्हारा सोहन सुन्दर श्याम प्यारा, बेगा आज्यो जी मथुरा नगरी जा कर म्हाने, भूल न ज्याजो जी गोपीजन सब भोली भाली, कपट न जाणे जी चतुर सभी मथुरा की नारी, रींझ न ज्याजो जी बंसी की धुन कान पड्या, घर बार भुला कर जी दौड़ी आई मोहन प्यारा, मिलणें थाँसे जी रोवण […]

Shiva Shiv Bane Radhika Shyam

शिवाशिव महिमा शिवा शिव बने राधिका श्याम एक बार कैलाश धाम में, शंकर दुर्गा संग करने लगे विहार वहाँ पर, अतिशय अद्भुत ढंग रूप मनोहर अति देवी का, मुग्ध हुए शिवशंकर लगे सोचने नारी को यह, रूप मिला अति सुन्दर शिव बोले मैं बनूँ राधिका, तुम नँदनंदन प्यारी बने प्रभु वृषभानुनंदिनी, दक्षसुता गिरिधारी देव देवियों […]

Shyam Tumhara Rup Anutha

अनूठा रूप श्याम तुम्हारा रूप अनूठा, कोटि अनंग लजाये चंचल चितवन कमल-नयन से, प्रेम सरस बरसाये स्निग्ध कपोल अरुणिमा जिनकी, दर्पण सम दमकाये मोर-मुकुट शीश पर शोभित, केश राशि लहराये कमनीय अंग किशोर मूर्ति के, दर्शन मन सरसाये पान करे गोपीजन प्रति पल, फिर भी नहीं अघाये ऐसा अद्भुत ज्योति-पुंज जो, मन का तिमिर भगाये […]

Shyam Dekh Darpan Main Bole

राधिका श्याम सौन्दर्य श्याम देख दर्पण में बोले ‘सुनो राधिका प्यारी आज बताओ मैं सुन्दर या तुम हो सुभगा न्यारी’ असमंजस में पड़ी राधिका, कौन अधिक रुचिकारी ‘हम का कहें कि मैं गोरी पर, तुम तो श्याम बिहारी’ जीत गई वृषभानु-दुलारी, मुग्ध हुए बनवारी भक्तों के सर्वस्व राधिका-श्याम युगल मनहारी  

Shyam Main Kaise Darshan Paun

दर्शन की चाह श्याम! मैं कैसे दर्शन पाऊँ दर्शन की उत्कट अभिलाषा और कहीं ना जाऊँ पूजा-विधि भलीभाँति न जानूँ कैसे तुम्हें रिझाऊँ माखन मिश्री का मैं प्रतिदिन, क्या मैं भोग लगाऊँ गोपीजन-सा भाव न मुझमें, कैसे प्रीति बढ़ाऊँ श्री राधा से प्रीति अनूठी, उनके गीत सुनाऊँ तुम्हीं श्याम बतलाओ मुझको, क्या मैं भेंट चढ़ाऊँ […]

Shyam Sundar Mathura Jayen

मथुरा गमन श्याम सुन्दर मथुरा जायें क्रूर बने अक्रूर, प्राणधन को लेने आये बिलख रही है राधारानी, धैर्य बँधाये कोई आने लगीं याद क्रीड़ाएँ, सुध-बुध सबने खोई प्यारी चितवन, मुख मण्डल को, देख गोपियाँ जीतीं संभावित मोहन वियोग से, कैसी उन पर बीती चित्त चुराया नेह लगाया, वही बिछुड़ जब जाये वाम विधाता हुआ सभी […]

Sandesha Shyam Ka Le Kar

गोपियों का वियोग संदेशा, श्याम का लेकर, उधोजी ब्रज में आये हैं कहा है श्यामसुन्दर ने गोपियों दूर मैं नहीं हूँ सभी में आत्मवत् हूँ मैं, चेतना मैं ही सबकी हूँ निरन्तर ध्यान हो मेरा, रखो मन पास में मेरे वृत्तियों से रहित होकर, रहोगी तुम निकट मेरे गोपियों ने कहा ऊधो, सिखाते योग विद्या […]

Dekhat Shyam Hase

सुदामा से भेंट देखत श्याम हँसे, सुदामा कूँ देखत श्याम हँसे फाटी तो फुलड़ियाँ पाँव उभाणे, चलताँ चरण घसे बालपणे का मीत सुदामा, अब क्यूँ दूर बसे कहा भावज ने भेंट पठाई, ताँदुल तीन पसे कित गई प्रभु मेरी टूटी टपरिया, माणिक महल लसे कित गई प्रभु मेरी गउअन बछियाँ, द्वार पे सब ही हँसे […]

Aai Chak Bulaye Shyam

वन भोजन आई छाक बुलाये स्याम यह सुनि सखा सबहि जुरि आये, सुबल, सुदामा अरु श्रीदाम कमलपत्र दोना पलास के, सब आगे धरि परसत जात ग्वाल मंडली मध्य स्याम घन, सब मिलि भोजन रूचि सो खात ऐसी भूख बीच यह भोजन, पठा दियौ जो जसुमति मात ‘सूर’,स्याम अपनो नहिं जेंवत, ग्वालन कर तें लै लै […]

Bujhat Shyam Kon Tu Gori

राधा कृष्ण भेंट बूझत श्याम कौन तूँ गोरी कहाँ रहति काकी है बेटी, देखी नहीं कहूँ ब्रज खोरी काहे को हम ब्रजतन आवति, खेलति रहति आपनी पोरी सुनति रहति श्रवननि नंद ढोटा, करत रहत माखन दधि-चोरी तुम्हरो कहा चोरि हम लैहैं, खेलन चलो संग मिलि जोरी ‘सूरदास’ प्रभु रसिक सिरोमनि, बातनि भुरइ राधिका भोरी