Madhukar Shyam Hamre Chor
चित-चोर मधुकर श्याम हमारे चोर मन हर लियो माधुरी मूरत, निरख नयन की कोर पकरे हुते आन उर अंतर, प्रेम प्रीति के जोर गये छुड़ाय तोर सब बंधन, दै गये हँसन अकोर उचक परों जागत निसि बीते, तारे गिनत भई भोर ‘सूरदास’ प्रभु हत मन मेरो, सरबस लै गयो नंदकिशोर
Lochan Bhaye Shyam Ke Nere
श्री कृष्ण छबि लोचन भए स्याम के नेरे एते पै सुख पावत कोटिक, मो न फेरि तन हेरे हा हा करत, परिहरि चरननि, ऐसे बस भए उनहीं उन कौ बदन बिलोकत निस दिन, मेरो कह्यौ न सुनहीं ललित त्रिभंगी छबि पै अटके, फटके मौसौं तोरि ‘सूर’, दसा यह मेरी कीन्ही, आपुन हरि सौं जोरि
Shyam Kahat Puja Giri Mani
अन्नकूट श्याम कहत पूजा गिरि मानी जो तुम भाव-भक्ति सों अरप्यो, देवराज सब जानी तुम देखत भोजन सब कीनो, अब तुम मोहि प्रत्याने बड़ो देव गिरिराज गोवर्धन, इनहि रहो तुम माने सेवा भली करी तुम मेरी, देव कही यह बानी ‘सूर’ नंद मुख चुंबत हरि को, यह पूजा तुम ठानी
Shyam Tan Shyam Man Shyam Hai Hamaro Dhan
प्राण धन श्याम तन, श्याम मन, श्याम है हमारो धन आठो जाम ऊधौ हमें, श्याम ही सो काम है श्याम हिये, श्याम तिये, श्याम बिनु नाहिं जियें आँधे की सी लाकरी, अधार श्याम नाम है श्याम गति, श्याम मति, श्याम ही है प्रानपति श्याम सुखदाई सो भलाई सोभाधाम है ऊधौ तुम भये बौरे, पाती लैकै […]
Sundar Shyam Piya Ki Jori
राधा-कृष्ण माधुरी सुन्दर स्याम पिया की जोरी रोम रोम सुंदरता निरखत, आनँद उमँग बह्योरी वे मधुकर ए कुंज कली, वे चतुर एहू नहिं भोरी प्रीति परस्पर करि दोउ सुख, बात जतन की जोरी वृंदावन वे, सिसु तमाल ए, कनक लता सी गोरी ‘सूर’ किसोर नवल नागर ए, नागरि नवल-किसोरी
Sundar Shyam Sakha Sab Sundar
सुंदर श्याम सुंदर स्याम सखा सब सुंदर, सुंदर वेष धरैं गोपाल सुंदर पथ सुंदर गति आवन, सुंदर मुरली शब्द रसाल सुंदर लोक, सकल ब्रज सुंदर, सुंदर हलधर, सुंदर चाल सुंदर वचन विलोकनि सुंदर, सुंदरि गन सब करति विचार ‘सूर’ स्याम को संग सुख सुंदर, सुंदर भक्त हेतु अवतार
Shyam Tori Murli Nek Bajaun
ठिठोली स्याम, तोरी मुरली नेक बजाऊँ जोइ-जोइ तान भरो मुरली में, सोइ सोइ गाय सुनाऊँ हमरी बिंदिया तुमही लगाओ, मैं सिर मुकुट धराऊँ हमरे भूषण तुम सब पहिरौ, मैं तुम्हरे सब पाऊँ तुमरे सिर माखन की मटकी, मैं मिलि ग्वाल लुटाऊँ तुम दधि बेचन जाओ वृन्दावन, मैं मग रोकन आऊँ मानिनी होकर मान करो तुम, […]
Shyam Bina Unaye Ye Badara
विरह व्यथा स्याम बिना उनये ये बदरा आज श्याम सपने में देखे, भरि आए नैन ढुरक गयो कजरा चंचल चपल अतिही चित-चोरा, निसि जागत मैका भयो पगोरा ‘सूरदास’ प्रभु कबहि मिलोगे, तजि गये गोकुल मिटि गयो झगरा
Shyam Bina Yah Koun Kare
श्याम की मोहिनी स्याम बिना यह कौन करै चित वहिं तै मोहिनी लगावै, नैक हँसनि पै मनहि हरै रोकि रह्यौ प्रातहिं गहि मारग, गिन करि के दधि दान लियौ तन की सुधि तबहीं तैं भूली, कछु कहि के दधि लूट लियौ मन के करत मनोरथ पूरन, चतुर नारि इहि भाँति कहैं ‘सूर’ स्याम मन हर्यौ […]
Shyam Moso Khelo Na Hori
होली स्याम मोसों खेलो न होरी, पाँव पडूं कर जोरी सगरी चुनरिया रँग न भिजाओ, इतनी सुन लो मोरी झपट लई मोरे हाथ ते गागर, करो मती बरजोरी दिल धड़कत मेरी साँस बढ़त है, देह कँपत रँग ढोरी अबीर गुलाल लिपट दियो मुख पे, सारी रँग में बोरी सास ननँद सब गारी दैहैं, आई उनकी […]