Shyam Liyo Giriraj Uthai

गिरिराज धरण स्याम लियो गिरिराज उठाई धीर धरो हरि कहत सबनि सौं, गिरि गोवर्धन करत सहाई नंद गोप ग्वालिनि के आगे, देव कह्यो यह प्रगट सुनाई काहै कौ व्याकुल भै डोलत, रच्छा करत देवता आई सत्य वचन गिरिदेव कहत हैं, कान्ह लेहिं मोहिं कर उचकाई ‘सूरदास’ नारी नर ब्रज के, कहत धन्य तुम कुँवर कन्हाई

Ab To Sanjh Bit Rahi Shyam

होली अब तो साँझ बीत रही श्याम, छोड़ो बहियाँ मोरी तुम ठहरे ब्रजराज कुँवरजी, हम ग्वालिन अति भोरी आनंद मगन कहूँ मैं मोहन,अब तो जाऊँ पौरी लाज बचेगी मोरी सास, ननद के चुपके छाने, तुम संग खेली होरी अँगुली पकरत पहुँचो पकरयो और करी बरजोरी हम हैं ब्रज की छोरी मीठी-मीठी तान बजाकर, लेन सखिन […]

Naina Nipat Shyam Chabi Atke

श्याम की मोहिनी नैना निपट श्याम छबि अटके देखत रूप मदनमोहन को, पियत पीयूष न भटके टेढ़ी कटि टेढ़ी कर मुरली, टेढ़ी पाग लर लटके ‘मीराँ’ प्रभु के रूप लुभानी, गिरिधर नागर नट के

Baje Baje Re Shyam Teri Pejaniyan

श्याम की पैंजनियाँ बाजे-बाजे रे स्याम तेरी पैजनियाँ माता यशोदा चलन सिखावत, उँगली पकड़ कर दो जनियाँ राजत अनुपम लाल झगुला, पीट बरन सुन्दर तनिया ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, तीन लोक के तुम धनिया

Baadar Dekh Dari Shyam

बादल देख डरी बादर देख डरी हो श्याम! मैं तो बादर देख डरी काली-पीली घटा उमड़ी, बरस्यो एक घरी जित जाऊँ तित पानी ही पानी, भई सब भोम हरी जाको पिव परदेस बसत है, भीजै बार खरी ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर,कीज्यो प्रीत खरी

Manmohan Shyam Hamara

श्याम की पाती मनमोहन श्याम हमारा निर्मल नीरा जमुन को त्याग्यौ, जाय पियौ जल खारा आप तो जाय द्वारका छाए, हमें छाँड़ि माझ धारा लिखि लिखि पाती भेजुँ स्याम कूँ, बाँचौ प्रीतम प्यारा ‘मीराँ’ के प्रभु हरि अविनासी, जीवन प्राण आधारा

Mere Ghar Aao Sundar Shyam

विरह व्यथा मेरे घर आवो सुन्दर श्याम तुम आया बिन सुख नहीं मेरे, पीरी परी जैसे पान मेरे आसा और न स्वामी, एक तिहारो ही ध्यान ‘मीराँ’ के प्रभु वेग मिलो अब, राखोजी मेरो मान

Vinati Suno Shyam Meri

विरह व्यथा विनती सुनो श्याम मेरी, मैं तो हो गई थारी चेरी दरसन कारण भई बावरी, विरह व्यथा तन घेरी तेरे कारण जोगण हूँगी, करूँ नगर बिच फेरी अंग गले मृगछाला ओढूँ, यो तन भसम करूँगी ‘मीराँ’ के प्रभु गिरिधर नागर, वन-वन बीच फिरूँगी

Shyam Milan Ro Ghano Umavo

मिलन की प्यास श्याम मिलणरो घणो उमावो, नित उठ जोऊँ बाट लगी लगन छूटँण की नाहीं, अब कुणसी है आँट बीत रह्या दिन तड़फत यूँ ही, पड़ी विरह की फाँस नैण दुखी दरसण कूँ तरसै, नाभि न बैठे साँस रात दिवस हिय दुःखी मेरो, कब हरि आवे पास ‘मीराँ’ के प्रभु कब रे मिलोगे, पूरवो […]

Shyam Mohi Mat Tarsavo Ji

विरह व्यथा श्याम मोहि मत तरसावोजी तुम्हरे कारन सब सुख छोड्या, अब क्यूँ देर लगावोजी विरह विथा लागी उर अंतर, सो तुम आय बुझावोजी अब मत छोड़ो मोहि प्रभुजी, हँस कर तुरत बुलावोजी ‘मीराँ’ दासी जनम-जनम की, अंग से अंग मिलावोजी