Man Ga Tu Madhav Rag Re
चेतावनी मन गा तू माधव राग रे, कर माधव से अनुराग रे कृष्ण भजन को नर तन पाया, यहाँ आय जग में भरमाया छोड़ छोड़ यह माया छाया, श्याम सुधारस पाग रे माधव ही तेरा अपना है, और सभी कोरा सपना है दुनिया से जुड़ना फँसना है, इस बंधन से भाग रे मोह निशा में […]
Mat Kar Itana Pyar Tu Tan Se
देह से प्रेम मत कर इतना प्यार तू तन से, नहीं रहेगा तेरा बहुत सँवारा इत्र लगाया, और कहे यह मेरा बढ़िया भोजन नित्य कराया, वस्त्रों का अंबार बचपन, यौवन बीत गया तब, उतरा मद का भार पति, पत्नी-बच्चों तक सीमित था तेरा संसार स्वारथ के साथी जिन पर ही, लूटा रहा सब प्यार सब […]
Bhula Raha Hai Tu Youwan Main
नवधा भक्ति भूला रहा तू यौवन में, क्यों नहीं समझता अभिमानी तू राग, द्वेष, सुख, माया में, तल्लीन हो रहा अज्ञानी जो विश्वसृजक करुणासागर की तन्मय होकर भक्ति करे प्रतिपाल वहीं तो भक्तों के, सारे संकट को दूर करें हरि स्मरण कीर्तन, दास्य, सख्य, पूजा और आत्मनिवेदन हो हरि-कथा श्रवण हो, वन्दन हो, अरु संतचरण […]
Budhapa Bairi Tu Kyon Kare Takor
वृद्धा अवस्था बुढ़ापा बैरी, तूँ क्यों करे टकोर यौवन में जो साथ रहे, वे स्नेही बने कठोर जीर्ण हो गया अब तन सारा, रोग व दर्द सताते गई शक्ति बोलो कुछ भी तो, ध्यान कोई ना देते चेत चेत रे मनवा अब तो, छोड़ सभी भोगों को राम-कृष्ण का भजन किये बिन, ठोर नहीं हैं […]
Tu So Raha Ab Tak Musafir
चेतावनी तूँ सो रहा अब तक मुसाफिर, जागता है क्यों नहीं था व्यस्त कारोबार में,अब भोग में खोया कहीं मोहवश जैसे पतिंगा, दीपक की लौ में जल मरे मतिमान तूँ घर बार में फिर, प्रीति इतनी क्यों करे लालच में पड़ता कीर ज्यों, पिंजरे में उसका हाल ज्यों फिर भी उलझता जा रहा, संसार माया […]
Tu Ga Le Prabhu Ke Geet
हरि भजन तूँ गा ले प्रभु के गीत दुनिया एक मुसाफिर खाना, जाना एक दिन छोड़ के मात-पिता बंधु सुत पत्नी, सब से नाता तोड़ के एक दिन ये सुन्दर घर तेरा मिट्टी में मिल जाएगा तुझे अचानक ले जाने को, काल एक दिन आएगा अब तो होश सँभालो प्यारे, व्यर्थ ही समय गँवाओ ना […]
Tu Apne Ko Pahchan Re
जीवात्मा तूँ अपने को पहचान रे ईश्वर अंश जीव अविनाशी, तूँ चेतन को जान रे घट घट में चेतन का वासा, उसका तुझे न भान रे परम् ब्रह्म का यह स्वरूप है, जो यथार्थ में ज्ञान रे रक्त मांस से बनी देह यह, जल जाती श्मशान रे वे विश्व वद्य वे जग-निवास, कर मन में […]
Chahta Jo Param Sukh Tu
नाम जप चाहता जो परम सुख तूँ, जाप कर हरिनाम का परम पावन परम सुन्दर, परम मंगल धाम का हैं सभी पातक पुराने, घास सूखे के समान भस्म करने को उन्हें, हरि नाम है पावक महान जाप करते जो चतुर नर, सावधानी से सदा वे न बँधते भूलकर, यम-पाश दारुण में कदा साथ मिलकर प्रेम […]
Kahe Ko Soch Kare Manwa Tu
कर्मयोग काहे को सोच करे मनवा तूँ! होनहार सब होता प्यारे मंत्र जाप से शांति मिले पर, विधि -विधान को कैसे टारे कर्म किया हो जैसा तुमने, तदनुसार प्रारब्ध बना है जैसी करनी वैसी भरनी, नियमबद्ध सब कुछ होना है हरिश्चन्द्र, नल, राम, युधिष्ठिर, नाम यशस्वी दुनिया जाने पाया कष्ट गये वो वन में, कर्म-भोग […]
Laga Le Prem Prabhu Se Tu
शरणागति लगाले प्रेम प्रभु से तू, अगर जो मोक्ष चाहता है रचा उसने जगत् सारा, पालता वो ही सबको है वही मालिक है दुनियाँ का, पिता माता विधाता है नहीं पाताल के अंदर, नहीं आकाश के ऊपर सदा वो पास है तेरे, ढूँढने क्यों तू जाता है पड़े जो शरण में उसकी, छोड़ दुनियाँ के […]