Man Le Manwa Murakh Tu

सीख मान ले मनवा मूरख तू, अब तो भज नाम निंरजन का माँ-उदर में जिसने पेट भरा, अब पेट के काज तू क्यों भटके दुनियाँ का पोषण जो करता, वह पालनहार तेरे तन का ये मात-पिता, भाई-बंधु, बेटा अरु, माल मकान सभी कोई वस्तु नहीं स्थिर है यहाँ, करले तू काम भलाई का ये काल […]

Tu Dayalu Din Ho Tu Dani Ho Bhikhari

शरणागति तू दयालु, दीन हौं, तू दानि, हौं भिखारी हौं प्रसिद्ध पातकी, तू पाप – पुंज – हारी नाथ तू अनाथ को, अनाथ कौन मोसो मो समान आरत नहिं, आरतहर तोसो ब्रह्म तू, हौं जीव, तू ठाकुर, हौं चेरो तात, मात, गुरु, सखा तू, सब बिधि हितू मेरो तोहि मोहिं नाते अनेक, मानियै जो भावै […]

Man Tu Kahe Bhayo Achet

प्रबोधन मन! तू काहे भयो अचेत भटकत रह्यो व्यर्थ में अब तक, कियो न हरि से हेत पायो मानुष-जन्म हाय! तू ताहि वृथा कर देत अरे भूलि हीरा कों बौरे, करत काँच सो हेत प्राननाथ सों प्रीति न करि तू, पूजत पामर प्रेत सुमिर सुमिर रे! सदा स्याम को, संतत स्नेह समेत

Mat Kar Moh Tu Hari Bhajan Ko Man Re

भजन महिमा मत कर मोह तू, हरि-भजन को मान रे नयन दिये दरसन करने को, श्रवण दिये सुन ज्ञान रे वदन दिया हरि गुण गाने को, हाथ दिये कर दान रे कहत ‘कबीर’ सुनो भाई साधो, कंचन निपजत खान रे

Din Yu Hi Bite Jate Hain Sumiran Kar Le Tu Ram Nam

नाम स्मरण दिन यूँ ही बीते जाते हैं, सुमिरन करले तूँ राम नाम लख चौरासी योनी भटका, तब मानुष के तन को पाया जिन स्वारथ में जीवन खोया, वे अंत समय पछताते हैं अपना जिसको तूँने समझा, वह झूठे जग की है माया क्यों हरि का नाम बीसार दिया, सब जीते जी के नाते हैं […]

Maiya Ri Tu Inaka Janati

राधा कृष्ण प्रीति मैया री तू इनका जानति बारम्बार बतायी हो जमुना तीर काल्हि मैं भूल्यो, बाँह पकड़ी गहि ल्यायी हो आवत इहाँ तोहि सकुचति है, मैं दे सौंह बुलायी हो ‘सूर’ स्याम ऐसे गुण-आगर, नागरि बहुत रिझायी हो

Bujhat Shyam Kon Tu Gori

राधा कृष्ण भेंट बूझत श्याम कौन तूँ गोरी कहाँ रहति काकी है बेटी, देखी नहीं कहूँ ब्रज खोरी काहे को हम ब्रजतन आवति, खेलति रहति आपनी पोरी सुनति रहति श्रवननि नंद ढोटा, करत रहत माखन दधि-चोरी तुम्हरो कहा चोरि हम लैहैं, खेलन चलो संग मिलि जोरी ‘सूरदास’ प्रभु रसिक सिरोमनि, बातनि भुरइ राधिका भोरी

Jo Tu Krishna Nam Dhan Dharto

नाम महिमा जो तूँ कृष्ण नाम धन धरतो अब को जनम आगिलो तेरो, दोऊ जनम सुधरतो जन को त्रास सबै मिटि जातो, भगत नाँउ तेरो परतो ‘सूरदास’ बैकुण्ठ लोक में, कोई न फेंट पकरतो

Kyon Tu Govind Nam Bisaro

नाम स्मरण क्यौं तू गोविंद नाम बिसारौ अजहूँ चेति, भजन करि हरि कौ, काल फिरत सिर ऊपर भारौ धन-सुत दारा काम न आवै, जिनहिं लागि आपुनपौ हारौ ‘सूरदास’ भगवंत-भजन बिनु, चल्यो पछिताइ नयन जल ढारौ

Kaha Kahati Tu Mohi Ri Mai

मनोवेग कहा कहति तू मोहि री माई नंदनँदन मन हर लियो मेरौ, तब तै मोकों कछु न सुहाई अब लौं नहिं जानति मैं को ही, कब तैं तू मेरे ढ़िंग आई कहाँ गेह, कहँ मात पिता हैं, कहाँ सजन गुरुजन कहाँ भाई कैसी लाज कानि है कैसी, कहा कहती ह्वै ह्वै रिसहाई अब तौ ‘सूर’ […]