Yashoda Nand Gopijan Dukhi Hai
विरह वेदना यशोदा, नन्द, गोपीजन, दुखी है विरह पीड़ा से परम प्यारा सभी का मैं, कहे यो श्याम उद्धव से उधोजी ब्रज में जाकर के, मिले तब नन्द बाबा से कभी गोविंद आयेंगे, यों पूछा नन्द ने उनसे बही तब आँसुओं की धार, यशोदा नन्द नयनों से रुँध गया कण्ठ दोनों का, बोल ना पाय […]
Yah Jiwan Kitna Sundar Hai
मानव जीवन यह जीवन कितना सुन्दर है जो सदुपयोग ना कर पाये, फिर तो पाया क्या जीवन में खाया पीया अरु भोग किया, अन्तर न रहा नर पशुओं में जो सोच समझने की शक्ति, वरदान रूप में मिली हमें उद्देश्य पूर्ण जीवन जीते, सुर दुर्लभ जीवन मिला हमें संस्कार साथ में ही जाते, इसका कुछ […]
He Gouri Putra Ganesh Gajanan
श्री गणेश प्राकट्य हे गौरी-पुत्र गणेश गजानन, सभी कामना पूर्ण करें कलियुग में पूजा अर्चन से, सारे कष्टों को शीघ्र हरे ब्रह्मा, विष्णु अरु रुद्र आप, अग्नि, वायु, रवि, चन्द्र आप श्रद्धा पूर्वक जो स्मरण करे, हर लेते सारे पाप ताप माँ पार्वती के सुत होकर के, प्रत्येक कल्प में जो आते वे परब्रह्म-भगवान कृष्ण, […]
Rang Darat Laj Na Aai
होली रंग डारत लाज न आई, नन्दजी के कुँवर कन्हाई माखन-चोर रसिक मतवारे, गलियन धूम मचाई, गुलचे खाये भूल गये क्यों, करन लगे ठकुराई सखि! वाँको शरम न आई हाथ लकुटिया काँधे कमरिया, बन बन धेनु चराई, जाति अहीर सबहिं जन जानत, करन लगे ठकुराई छलिये जानत लोग लुगाई मात जसोदा ऊखल बाँधे, रोनी सूरति […]
Rachyo Annakut Vidhivat Hai
अन्नकूट रच्यौ अन्नकूट विधिवत् है ब्रज में पाक बनाये गोप गोपियाँ ग्वाल-बाल, मन मोद बढ़ाये मीठे और चरपरे व्यंजन, मन ललचाये गिनती हो नहीं सके, देख सब ही चकराये तुलसी दल की पुष्पमाल गोवर्धन पहने चंदन केशर तो ललाट पे, शोभित गहने मोरपंख का मुकट, गले में तो वनमाला गोवर्धन ये नहीं, किन्तु है नंद […]
Rasiya Ko Nar Banao Ri
होली रसिया को नार बनाओ री, रसिया को कटि लहँगा, उर माँहि कंचुकी, चूनर आज ओढ़ाओरी बिंदी भाल नयन में कजरा, नक बेसर पहनाओरी सजा धजा जसुमति के आगे, याको नाच नचाओरी होरी में न लाज रहे सखियाँ, मिल कर के आज चिढ़ाओरी
Rahte Ho Saath Nitya Prabhu Ji
पूजा रहते हो साथ नित्य प्रभुजी, आठ प्रहर दिन रात ही क्यों देख नहीं पाते तुमको, यह अचरज मुझको खलता ही मैं बैठ के नित्य ही आसन पर, लेकर सामग्री हाथों में पूजा करता हूँ विधिवत ही, तब भी दर्शन नहीं पाता मैं आरती दीप से करता हूँ, स्तुति गान भी हूँ गाता तब भी […]
Raghav Sarayu Tat Par Viharen
सरयू तट राघव सरयू तट पर विहरें भरत लक्ष्मण और शत्रुघन, सब आनन्द भरें पुष्पों की सुन्दर मालाएँ, सबही कण्ठ धरें मन्द मन्द मुसकान अधर पे, शोभा चित्त हरे कल कल ध्वनि सरयू के जल की, सबके मन हरषे देव-देवियाँ सभी गगन से, सुमन बहुत बरषे
Radha Mul Shakti Avatar
शक्ति रुपिणी राधा राधा मूल-शक्ति अवतार प्रेम वही, पुरषार्थ वही है, वही सृष्टि-विस्तार परम ज्योति उतरी बरसाना, महिमा अपरम्पार सेवाधाम बना वृन्दावन, लीला मधुर अपार सरल-सरस जीवन अति प्रमुदित, कैसा मृदु-व्यवहार राधा-प्रेरित कान्हा द्वारा, हुआ जगत् उद्धार
Ram Ka Gungan Kariye
श्री राम महिमा राम का गुणगान करिए राम के गुण का हो चिंतन, राम-गुण का स्मरण कीर्तन, मनुजता को हृदय में धर, आप जीवन सफल करिए, मनन करिए, ध्यान धरिए, राम का…. सगुण ब्रह्म स्वरूप सुंदर, सृजन, पालन चरित सुखकर, परम-आत्मा, जगत्-आत्मा, राम को प्रणाम करिये, मनन करिए ध्यान धरिए, राम का….