Aaj Rawal Main Jay Jaykar
श्रीश्री राधा प्राकट्य आज रावल में जय-जयकार भयो यहाँ वृषभानु गोप के, श्री राधा अवतार सज-धज के सब चलीं वेग तें, गावत मंगलाचार पृथ्वी पर त्रिभुवन की शोभा, रूप रासि सुखसार निरखत गावत देत बधाई, तभी भीर भई द्वार ‘परमानँद’ वृषभानु- नंदिनी, जोरी नंदकुमार
Aaj Braj Main Chayo Anand
श्रीकृष्ण प्राकट्य आज व्रज में छायो आनन्द नंद महर घर ढोटा आयो, पूरण परमानंद विविध भाँति बाजे बाजत हैं, वेद पढ़त द्विज-वृंद छिरकत दूध दही घृत माखन, मोहन-मुख अरविन्द देत दान ब्रजराज मगन मन, फूलत नाहिं समाय देते असीस सबहिं जन ब्रज के, बार-बार बलि जाय
Aaj Sakhi Raghav Ki Sudhi Aai
स्मृति आज सखि! राघव की सुधि आई आगे आगे राम चलत है, पीछे लक्ष्मण भाई इनके बीच में चलत जानकी, चिन्ता अधिक सताई सावन गरजे भादों बरसे,पवन चलत पुरवाई कौन वृक्ष तल भीजत होंगे, राम लखन दोउ भाई राम बिना मोरी सूनी अयोध्या, लक्ष्मण बिन ठकुराई सीता बिन मोरी सूनी रसोई, महल उदासी छाई
Aatma Ka Bhojan Prarthana
प्रार्थना आत्मा का भोजन प्रार्थना, भूले नहीं, प्रतिदिन करें अन्तःकरण से प्रार्थना, सब शोक चिन्ता को हरें जीवन में सच्ची शांति सुख, प्रभु प्रार्थना से प्राप्त हो दत्त चित्त हो प्रार्थना करें, प्रतीति निश्चित सुलभ हो मीराँ के मन में प्रेम था, तो विष भी अमृत हो गया निष्काम होए प्रार्थना, समझो प्रभु ने सुन […]
Aado Devaki Garbha Jananam
श्रीमद्भागवत् आदौ देवकि देव गर्भ-जननम्, गोपी गृहे वर्धनम् माया मोहित जीव-ताप हरणं, गोवर्द्धनो धारणम् कंसच्छेदन कौरवादि हननं, कुन्ती-सुता पालनम् एतद् श्रीमद्भागवत् पुराण कथितं, श्रीकृष्णलीलामृतम्
Adhyatmik Jivan Ko Jiye
अध्यात्म चिंतन आध्यात्मिक जीवन को जीये, सुख शांति सुलभ होगी अपार धन दौलत अथवा विषय भोग की, लिप्सा में कोई न सार तृष्णा का अन्त नहीं आता, बेचैन सदा ही मन रहता संपत्ति सुखों के चक्कर में, आशाओं से मन नहिं भरता जहाँ ममता, चाह, अहं न रहे, निस्पृह होकर विचरण करते तब शांति सुलभ […]
Anand Adhik Hai Bhakti Main
भक्ति-भाव आनन्द अधिक है भक्ति में आकर्षण ऐसा न त्याग में, योग, ज्ञान या यज्ञों में गोदी में बैठ यशोदा के, जो माँ का मोद बढ़ाते वे बिना बुलाये प्रायः ही, पाण्डव के घर प्रभु आते रुक्मिणी के हित व्याकुल इतने, सो नहीं रात्रि में पाते वे लगते गले सुदामा के तो अश्रु प्रवाहित होते […]
Anand Kand Shri Krishna Chandra
श्रीकृष्ण सौन्दर्य आनन्दकन्द श्री कृष्णचन्द्र, सिर मोर-मुकुट की छवि न्यारी मुसकान मधुर चंचल चितवन, वह रूप विलक्षण मनहारी कटि में स्वर्णिम पीताम्बर है, शोभा अपूर्व अति सुखकारी जो कामकला के सागर हैं, नटनागर यमुना-तट चारी वंशी की मधुर ध्वनि करते, संग में श्री राधा सुकुमारी गोवर्धन धारण की लीला, वर्णनातीत अति प्रियकारी कालियानाग के मस्तक […]
Aaya Sharan Tumhari Prabhu Ji
शरणागति आया शरण तुम्हारी प्रभुजी, रखिये लाज हमारी कनकशिपु ने दिया कष्ट, प्रह्ललाद भक्त को भारी किया दैत्य का अंत तुम्हीं ने, भक्तों के हितकारी ग्रस्त हुआ गजराज ग्राह से, स्तुति करी तुम्हारी आर्तस्तव सुन मुक्त किया, गज को तुमने बनवारी पांचाली की लगा खींचने, जब दुःशासन सारी किया प्रवेश चीर में उसके, होने दी […]
Aashadh Mas Ki Poonam Thi
महर्षि व्यास आषाढ़ मास की पूनम थी, तब व्यास देव का जन्म हुआ वेदों के मंत्रों, सूक्तों को, संहिता रूप से पिरो दिया पुराण अठारह उप-पुराण में, वेदों का विस्तार किया महाभारत द्वारा भारत का, सांस्कृतिक कोष निर्माण किया साहित्य समृद्ध इतना उनका, गुरु पद से उनको मान दिया भगवान व्यास के हम कृतज्ञ, उनको […]