Aasakti Jagat Ki Nashta Kare

सत्संग की महिमा आसक्ति जगत् की नष्ट करें, खुल जाता है मुक्ति का द्वार स्वाध्याय, सांख्य व योग, त्याग, प्रभु को प्रसन्न उतने न करें व्रत, यज्ञ, वेद या तीर्थाटन, यम, नियम, प्रभु को वश न करें तीनों युग में सत्संग सुलभ, जो करे प्रेम से नर नारी यह साधन श्रेष्ठ सुगम निश्चित, दे पूर्ण […]

Ichchaaon Ka Parityag Karo

प्रबोधन इच्छाओं का परित्याग करो कर्त्तव्य करो, निष्काम रहो एवम् सेवा का कार्य करो जो कुछ भी प्रभु से मिला हमें,वह करें समर्पित उनको ही संकल्प जो कि हम करें जभी संयमित जपें प्रभु को ही मन को मत खाली रहने दो, वरना प्रपंच घुस जायेगा इसलिये सदा शुभ कर्म करो, दुर्भाव न मन में […]

Itna To Karna Swami Jab Pran Tan Se Nikale

विनती इतना तो करना स्वामी, जब प्राण तन से निकले गोविन्द नाम लेकर, फिर प्राण तन से निकले श्री यमुनाजी का तट हो, स्थान वंशी-वट हो मेरा साँवरा निकट हो, जब प्राण तन से निकलें श्री वृन्दावन का थल हो, मेरे मुख में तुलसी दल हो विष्णु-चरण का जल हो, जब प्राण तन से निकलें […]

Om Ke Gayen Sab Mil Geet

ॐ वन्दना ॐ के गायें सब मिल गीत सकल सृष्टि आधार प्रणव है, धर्म कर्म का सार यही है कण-कण इसमें, यह कण कण में, निराकार साकार यही है सच्चिदानंदघन भी ये ही है, वेदों का भी जनक यही है गायें गीत ॐ के जो जन, मन वांछित फल पाता है जन्म मरण चक्कर से […]

Utrai Le Lo Kewat Ji

केवट का प्रेम (राजस्थानी) उतराई ले लो केवटजी, थाँरी नाव की चरण पकड़ यूँ केवट बोल्यो, सुणो राम रघुराई थाँरी म्हारी जात न न्यारी, ल्यूँ कइयाँ उतराई धोबी सूँ धोबी ना लेवे, कपड़ो लेत धुलाई नाई सूँ नाई ना लेवे, बालाँ की कतराई थे केवट हो भवसागर का, म्हारे नदी तलाई जब मैं आऊँ घाट […]

Udatta Charit Shri Raghav Ka

श्रीराम चरित्र उदात्त चरित श्री राघव का कर पाये थोड़ा अनुसरण, आदर्श बने जीवन उसका शील, शक्ति व सदाचार का, संगम प्रभु का जीवन है वे सत्वादी स्थित-प्रज्ञ, गम्भीर, गुणों के सागर है श्री राम धर्म के विग्रह ही अन्यत्र जो मिलना दुर्लभ है आदर्श पुत्र, भ्राता व मित्र पति की भी वे अभिव्यक्ति है […]

Uddeshya Purna Yah Jiwan Ho

जीवन का उद्देश्य उद्देश्यपूर्ण यह जीवन हो लक्ष्य के प्रकार पर ही निर्भर, मानव स्वरूप जैसा भी हो जो सुख की खोज में भटक रहे, प्रायः दुःख ही मिलता उनको हो जाय समर्पित यह जीवन, एकमात्र प्रभु के पाने को वे अन्दर ही हैं दूर नहीं, प्रभु की इच्छा सर्वोपरि हो सौंप दे समस्याएँ भी […]

Udho Hamen Na Shyam Viyog

प्रीति की रीति ऊधौ! हमें न श्याम वियोग सदा हृदय में वे ही बसते, अनुपम यह संजोग बाहर भीतर नित्य यहाँ, मनमोहन ही तो छाये बिन सानिध्य श्याम के हम को, कुछ भी नहीं सुहाये तन में, मन में, इस जीवन में, केवल श्याम समाये पल भर भी विलग नहीं वे होते, हमें रोष क्यों […]

Rishi Muni Sab Dev Pukar Rahe

परब्रह्म श्रीकृष्ण ऋषि मुनि सब देव पुकार रहे, श्रीकृष्ण हरे गोविन्द हरे उन विश्वंद्य का संकीर्तन हो आर्तवाणि से दु:ख टरे असुरों के अत्याचारों से, हो रहा घना था धर्म-नाश सब देव गये गोलोक धाम, जो है प्रसिद्ध श्रीकृष्ण-वास इक दृश्य अलौकिक वहाँ देख, आश्चर्य चकित सब देव हुए नारायण, नरसिंह, राम, हरि, श्री कृष्ण-तेज […]

Ek Ram Bharosa Hi Kali Main

राम भरोसा एक राम भरोसा ही कलि में वर्णाश्रम धर्म न दिखे कहीं, सुख ही छाया सबके मन में दृढ़ इच्छा विषय भोग की ने, कर्म, भक्ति, ज्ञान को नष्ट किया वचनों में ही वैराग्य बचा और वेष ने सबको लूट लिया सच्चे मन से जो जीवन में, रामाश्रित कोई हो पाये भगवान अनुग्रह से […]