Shri Bhagvad Gita Divya Shastra

गीतोपदेश श्री भगवद्गीता दिव्य शास्त्र जिसमें वेदों का भरा सार वाणी द्वारा इसका माहात्म्य, अद्भुत कोई पाता न पार भगवान् कृष्ण-मुख से निसृत, यह अमृत इसका पान करे स्वाध्याय करे जो गीता का, उसके यह सारे क्लेश हरे मृगतृष्णा-जल जैसी दुनिया, आसक्ति मोह का त्याग करें कर्तापन का अभिमान छोड़, हम शास्त्र विहित ही कर्म […]

Shrimad Bhagawat Ki Dhwani Hi Se

श्रीमद्भागवत् महिमा श्रीमद्भागवत् की ध्वनि ही से, सब दोष नष्ट हो जाते हैं यह वासुदेव वाङ्मय स्वरूप, इसका दर्शन नित सेवन हो फलरूप वेद-उपनिषद् का ये, दुख शोक नाश यह करता है सर्वोच्च है सभी पुराणों में, इसकी महिमा का पार नहीं रसपूर्ण कथा आयोजित हो, वहाँ भक्ति देवि आ जाती है भगवान् कृष्ण की […]

Shri Vrindavan Bhakti Ka

श्री वृन्दावन महिमा श्रीवृन्दावन भक्ति का, अनुपम रसमय धाम महिमा अपरम्पार है, कण कण राधे श्याम वृन्दावन अनुराग का, केन्द्र श्रेष्ठ सुख-वास यमुनाजी के पुलिन पर, श्याम रचाये रास नाम, धाम, लीला सभी, श्रीहरि के ही रूप ब्रज चौरासी कोस में, वृन्दा-विपिन अनूप श्रीवृन्दावन कुंज में, विहरें श्यामा श्याम क्रीड़ा नित नूतन करें, सुखद रूप […]

Sanakadik Devon Ke Purvaj

श्री सनकादि का उपदेश सनकादिक देवों के पूर्वज, ब्रह्माजी के मानस ये पूत मन में जिनके आसक्ति नहीं, वे तेजस्वी प्रज्ञा अकूत है सदुपदेश उनका ये ही ‘धन इन्द्रिय-सुख के हों न दास’ पुरुषार्थ चतुष्टय उपादेय, सद्भाव, चरित का हो विकास विद्या सम कोई दान नहीं, सत् के समान तप और नहीं आसक्ति सदृश न […]

Anupranit Vaidik Dharma Kiya

आद्य शंकराचार्य अनुप्राणित वैदिक धर्म किया, श्रद्धा से उनका स्मरण करें वे ज्ञान मूर्ति शंकर ही थे, हम सादर उन्हें प्रणाम करें जब धर्म अवैदिक फैल गया तो ब्रह्मवाद हो गया मन्द अवतरित हुए शंकराचार्य तो श्रुति विरोध का हुआ अंत आचार्य-चरण से सुलभ हमें स्तुतियाँ श्रेष्ठ प्रभु-विग्रह की श्रद्धापूर्वक हम गान करें, हो सुदृढ़ […]

Janani Main Na Jiu Bin Ram

भरत की व्यथा जननी मैं न जीऊँ बिन राम राम लखन सिया वन को सिधाये, राउ गये सुर धाम कुटिल कुबुद्धि कैकेय नंदिनि, बसिये न वाके ग्राम प्रात भये हम ही वन जैहैं, अवध नहीं कछु काम ‘तुलसी’ भरत प्रेम की महिमा, रटत निरंतर नाम

Purte Nikasi Raghuvir Vadhu

वन में सीता राम पुरतें निकसी रघुवीर वधू धरि धीर दए मग में डग द्वै झलकीं भरि भाल कनीं जल कीं, पुट सूखि गए मधुराधर वै फिरि बूझति है, चलनो अब केतिक पर्ण कुटी करिहौ कित ह्वै तिय की लखि आतुरता पिय की अखियाँ अति चारु चलीं जल च्वै

Suni Sundar Ben Sudharas Sane

सुभाषित सुनि सुन्दर बैन सुधारस-साने, सयानी है जानकी जानी भली तिरछे करि नैन दै सैन तिन्हैं, समुझाई कछु मुसुकाई चली ‘तुलसी’ तेहि अवसर सोहैं सबै, अवलोकति लोचन-लाहु अली अनुराग-तड़ाग में भानु उदै, बिगसी मनी मंजुल कंज-कली

Ve Hain Rohini Sut Ram

श्री बलरामजी वे हैं रोहिनी सुत राम गौर अंग सुरंग लोचन, प्रलय जिन के ताम एक कुंडल स्रवन धारी, द्यौत दरसी ग्राम नील अंबर अंग धारी, स्याम पूरन काम ताल बल इन बच्छ मार्यौ, ब्रह्म पूरन काम ‘सूर’ प्रभु आकरषि, तातैं संकरषन है नाम

Ganga Ganga Kahe Nitya

गंगा महिमा गंगा गंगा कहें नित्य गंगा जल पीवैं सदा बसै तट निकट, गंग- जल हीतें जीवैं गंगारज तन लाइ, नहावैं गंगा जल महँ बसैं गंगपथ परसि अनिल, बिहरैं जिहिं थल महँ श्री गंगा के नाम तें, कोटि जनम पातक नसहिं भोगे भू पै भोग बहु, अन्त जाहि सुरपुर बसहिं