Janani Janki Jad Jivani Dhing Chyon Tum Aayi
श्री जानकी स्तुति जननि जानकी! जड़ जीवनि ढिँग च्यौं तुम आयीं च्यौं अति करुनामयी दुखद लीला दरसायीं तब करुना के पात्र अज्ञ, जड़ जीव नहीं माँ करुनावश ह्वै जगत हेतु, अति विपति सहीं माँ हाय! कहाँ अति मृदुल पद, कहँ कंकड़युत पथ विकट ह्वैकें अति प्रिय राम की, रहि न सकीं तिनके निकट
Dhani Dhani Vrindawan Var Dham
श्री वृन्दावन धाम धनि धनि वृन्दावन वर धाम भौतिकता तो नहीं जरा भी, जग प्रपंच को नहिं कछु काम श्यामा श्याम केलि थल अनुपम, नित नूतन क्रीड़ा अभिराम लाड़ लड़ावति लली लालकूँ, राग भोग तजि और न काम पालन सृजन प्रलय देवन को, काम करें अज हरि हर नाम नित्य किशोर किशोरी संग में, रचै […]
Param Dham Saket Ayodhya
श्री अयोध्या धाम परम धाम साकेत अयोध्या, सुख सरसावनि हरन सकल सन्ताप, जगत के दुःख नसावनि सरयू को शुभ नीर, पीर सबई हरि लेवै हियकूँ शीतल करै अन्त में, प्रभु पद देवै करें धाम मँह बास जे, ते निश्चत तरि जायँगे कामी सब अघ मेंटि कें, धाम प्रभाव दिखायँगे
Saras Ras Hai Vrindavan Main
श्री वृन्दावन सरस रस है वृन्दावन में ग्यान ध्यान को मान न, रति-रस सरसत जन मन में राधे राधे-कहहिं लग्यौ मन, राधा जीवन में सबही को है सहज भाव, निजता को मोहन में ललन-लली की लाली ही तो, छाई कन कन में गोपी गोप मनहुँ प्रगटे नर-नारिन के तन में प्रिय को नित्य विहार प्रिया […]
Antarman Se Karu Archana
गायत्री स्तवन अन्तर्मन से करूँ, अर्चना हे गायत्री माता जपे आपका महामंत्र, वह सभी सिद्धियाँ पाता अनुपम रूप आपका माता, वर्णन हो नहीं पाता महिमा अपरम्पार आपकी, भक्तों की हो त्राता दिव्य तेज की एक किरण से, मन प्रकाश भर जाता
Adbhut Shri Vrindavan Dham
वृन्दावन धामअद्भुत श्री वृन्दावन धाम यमुनाजी की धारा बहती, केलि राधिका श्याम मुरली की ध्वनि मधुर गूँजती और नाचते मोर इकटक निरख रहे पशु पक्षी, नटवर नन्द-किशोर बंशी स्वर, मयूर नृत्य में, स्पर्धा रुचिकारी पाँख मोर की निकल पड़ी, तो मोहन सिर पर धारी राधारानी के मयूर की, भेंट मिली कान्हा को इसीलिये सहर्ष श्याम […]
Janak Mudit Man Tutat Pinak Ke
धनुष भंग जनक मुदित मन टूटत पिनाक के बाजे हैं बधावने, सुहावने सुमंगल-गान भयो सुख एकरस रानी राजा राँक के दुंदभी बजाई, सुनि हरषि बरषि फूल सुरगन नाचैं नाच नाय कहू नाक के ‘तुलसी’ महीस देखे दिन रजनीस जैसे सूने परे सून से, मनो मिटाय आँक के
Anant Guno Ke Jo Sagar
प्रभु संकर्षण वंदना अनन्त गुणों के जो सागर, प्रभु संकर्षण को नमस्कार मस्तक उनके जो हैं सहस्त्र, एक ही पर पृथ्वी का अधार देवता असुर गन्धर्व, सिद्ध, मुनिगण भी पाये नहीं पार एक कान में कुण्डल जगमगाय, शोभित है अंग पे नीलाम्बर कर हल की मठू पर रखा हुआ, वक्ष:स्थल पे वैजन्ती हार भगवान कृष्ण […]
Anurag Mai Vardan Mai
भारत माता अनुरागमयी वरदानमयी भारत जननी भारत माता! मस्तक पर शोभित शतदल सा, यह हिमगिरि है शोभा पाता नीलम-मोती की माला सा, गंगा-यमुना जल लहराता वात्सल्यमयी तू स्नेहमयी, भारत जननी भारत माता सूरज की सुनहरी किरणों से गूंथी लेकर के मालाएँ सौंदर्यमयी श्रृंगारमयी, भारत जननी भारत माता तेरे पग पूजन को आतीं, सागर लहरों की […]
Ayodhya Durjan Dosh Hare
अयोध्या अयोध्या दुर्जय दोष हरे परमधाम साकेत राम का, शान्ति प्रदान करे सरयू-जल में स्नान ध्यान से, मन का मैल जरे स्मरण राम की लीलाओं का, मन को मुदित करे मनः बुद्धि निर्मल हो जाए, राघव कृपा करे